दाग़

  • Post category:Hindi
  • Post comments:0 Comments

दाग़ कितना भी छोटा हो, अपनी पहचान बनाए रखता है. नज़र उतारने वाला काला टीका अलग था, वो जो मां बचपन में नज़र उतारने के लिए रोज़ सुबह लगाती थी. शाम होते होते टीका कहीं ग़ायब हो जाता. टीका मिटकर मां को यक़ीन दिला जाता की उसने दिन भर हिफाज़त की, बच्चा हंसता खेलता रहा. दाग़ अपनी जगह ख़ुद चुन लेता है, अपनी सहूलियत से. जाने अनजाने में आप दाग़ के लिए रास्ता बना देते हैं. जो बोया है वो ही उगेगा, नियम ऊपर वाले ने बनाया है. दाग़ अपने आप उभर आता है. ...

Continue Readingदाग़

शुभ चिंतकों के नाम पत्र

  • Post category:Hindi
  • Post comments:0 Comments

सच के होने का बोध कौन जान सकता है? वही जो सच का बोझ उठाये. सच के सवालों से घिर जाने पर, सारा रास्ता बंद हो जाता है. हिम्मत जुटा कर, और छाती फुलाकर सच का सामना करना होता है, अपना रास्ता खोलना होता है. इसके इलावा और कोई उपाय क्या है! ख़बरों में बने हुए हैं, लोग नज़रें गड़ा कर देख रहें हैं. दोस्तों को भी चैन तो नहीं ही है, मेसेज भेज कर पूछ रहे हैं, "कैसे हो, सब ख़ैरियत है, क्या चल रहा है". हमारे शुभचिंतक हों या न हों चिंता सभी को है. लेकिन समस्या तो हमारी है, हल हमें ही ढूँढना है, सच का इम्तिहान भी कितनी बार देना होगा!

Continue Readingशुभ चिंतकों के नाम पत्र

डिजिटल युग का प्यार

  • Post category:Hindi
  • Post comments:2 Comments

ये कौन सा गुलाब है जिसमें कोई खुशबू नहीं! कहीं से आया, फिर कहीं और भेज दिया, मतलब फॉरवर्ड कर दिया. गुलाब प्यार का प्रतीक बनकर बार-बार एक जगह से दूसरी जगह टहल रहा है. इस डिजिटल युग में टहलने का कोई खर्चा भी नहीं है. गुलाब को टहलने में, मज़ा आ रहा होगा या दुःख, ये तो पता नहीं.

Continue Readingडिजिटल युग का प्यार