तीन के ख़ुमार में खो ही गया, जैसे रात को भी सपने आने लगे. मैंने देखा धन्नो अकेली मिसिसिपी नदी के किनारे ट्रेल पर खड़ी है. ट्रेल पर दूर-दूर तक कोई नहीं है, और तीन रंगीले जवान धन्नो को घेरे हुए हैं. मैं अकेला, कैसे तीन का मुक़ाबला करूँ! अगर मिसिसिपी की जगह गंगा मईया होती तो उन्हें अकेली धन्नो पर ज़रूर तरस आता, कोई न कोई चमत्कार होता.
धन्नो का नाम भी थोड़ा अलग है, रज़िया रखता तो अच्छा था. ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगा सकते थे, रज़िया गुंडों में फँस गई है. सुनते ही रज़िया को बचाने वालों की लाइन लग जाती. लेकिन ये सब सोच कर क्या फ़ायदा! धन्नो का नाम भी अनोखा है, और प्यार में भी धोखा है. वो कैसा प्रेमी जो उसकी रक्षा न कर सके, बस चमत्कार के भरोसे मिसिसिपी नदी की ओर देखे जा रहा है.




उतने में तीन रंगीलों में से एक ने उसकी तरफ़ देखा. बिलकुल हैरान था हूबहू हमारा चेहरा, गेरुआ रंग की बाइकिंग जैकेट और हँसता हुआ चेहरा. सोचने लगा हमारा हमशक्ल ये कौन है, इतने में बाक़ी दो रंगीले भी सामने आ गये. हरी और ब्लू जैकेट में, तीनों ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगा रहे थे, बिलकुल गब्बर की तरह. तीन-तीन गब्बर और एक अकेली जान, बहुत नाइंसाफ़ी है. फिर उनकी हँसी रुकी, बिलकुल शांति थी, जैसे गब्बर ने बोला अब गोली खा और बिलकुल सन्नाटा छा गया.
रंगीलों ने एक आवाज़ में कहा- “नहीं पहचाना, तुम्हारा हमशक्ल नहीं, ये तुम ही हो अलग-अलग भेष में. भगवा, हरा और ब्लू का चोला पहन कर दशानन की राह पर चलना छोड़ दो. तुम्हारी अपनी ही प्रेमिका बहुरूपी चेहरा देख कर कैसे डर गई, और तुम नींद में डर कर जाग गए.
मैंने कहा अब जाग ही गए तो आँखों में आँखें डाल कर आइना में देख लो, मन शांत हो जाएगा. रात के दो बजे होंगे। फिर ध्यान आया, ज़रा धन्नो को देख लूँ। धन्नो गैराज में आराम से खड़ी थी, मानो सो रही हो. चलो अच्छा है सब आराम से हैं.
शब्दों से खेल कर, ख़्वाब के रीमेक कोशिश की है. ख़्वाब को क़लम बंद करना भी एक इम्तिहान है, आधे जगे आधे सोए. ख़्वाब सुहाने होते हैं, कुछ डरावने, हमें जगाते हैं . रंग बिरंगी वेशभूषा पहनने की क़ीमत चूकाना आसान नहीं.
वो अब आईने धोता फिर रहा है,
उसे चेहरे पे शक होने लगा था।
राहत इंदौरी
ख़लीक़


बहुत गहरी बात कही धन्नो के माध्यम से
आपका बहुत बहुत आभार, अपना लेख किसे नहीं अच्छा लगता. लेकिन अगर बात पाठकों तक पहुंच जाए तो मक़सद पूरा हो जाता है हम कोशिश करते रहें
Thank you for your feedback Vibha ji…