“मैं समय हूँ, मेरा कोई अंत नहीं” महाभारत के टीवी सीरियल की यह आवाज़ अब भी कानों में गूंजती है. समय रुकता नहीं, लेकिन शनिवार रात सात सात घड़ियों की सुई को रोक कर पीछे कर रहा था. हर घड़ी की सुई एक घंटा पीछे कर असीम दैवी शक्ति का आभास हो रहा था , जैसे समय पर मेरा अधिकार हो.

तभी ज़ोर से आवाज़ आई “कल से day light saving शुरू हो जायेगा, एक काम कहा था, घड़ियाँ दुरुस्त करलो. पिछले बीस मिनट से लगे हो.”
“बीस मिनट”, घड़ी की सूई रोकने का मतलब समय का रुकना नहीं होता. “कलयुग में मानव के दैवी शक्ति का आभास, एक भ्रम से ज़्यादा और कुछ भी नहीं.यथार्थ में जी कर समय की क़दर करना ज़्यादा ज़रूरी है”.
मैंने कहा “काम होगया, घड़ियाँ अब सही समय बता रही हैं “.
रखो तुम बंद बे-शक अपनी घड़ियाँ
समय तो रात दिन चलता रहेगा
राणा गन्नौरी
ख़लीक़

