पहचान मुझे

मैँ तेरी परछाई हूँ, पहचान मुझे
तेरी मजबूरी है, पहचान मुझे

मैं तेरे साथ हूँ, और कोई नहीं
Covid का शूकर मना, पहचान मुझे

मौक़ा तो मिला,अकेला तो नहीं
मेरी आवाज़. सुन, पहचान मुझे

परछाई हूँ, होजाता है क़द, छोटा और बड़ा
वक़्त के साथ इंसानों, के ओहदों, की तरह

भरम है, इतराना और बहक जाना
रौशनी की चका चौंध में गुम हो जाना

रौशनी के सिम्त का, है खेल सारा
सच है, रोशनी से ही, वुजूद मेरा

पहचान खुदको, रौशनी को ,पहचान “मुझे”
मैँ तेरी परछाई हूँ, पहचान मुझे

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