चैटजीपीटी (ChatGPT)
कवी मन की बात को व्याकुल होकर अपनी क़लम की रोशनाई के सहारे कागज़ पर उतारता है। कागज़ को बार बार पढता है, ख़ुद से पूछता है। दिल की पीड़ा कागज़ पर आइना बनकर उतरी या नहीं।इस क्रम में शब्दों को काटता छांटता और जोड़ता है। जैसे दर्ज़ी, एक सुंदरी के लिए पोशाक तैयार कर रहा हो।बस उसकी कविता विश्व सुंदरी बन जाए, महफ़िल में खुब वाह वाही लुटे। उसके दिल की बात लोगों के दिलों को छू ले। लेकिन कविता सुनाने के क्रम में दूसरों की कविता पहले सुन्नी पड़ती है। वो अपनी सुना कर भाग खड़े होते हैं, अरे नंबर जो देर से आया।मन की पीड़ा कागज़ पर उतार तो लिया, लेकिन मन में नई पीड़ा उभरने लगी।भाई थोड़ा तो रुक जाते, हमारी भी सुन लेते, यूँ छोड़ के ना जाओ.

