चैटजीपीटी  (ChatGPT) 

कवि मन की बात को व्याकुल होकर अपनी क़लम की रोशनाई के सहारे कागज़ पर उतारता है। कागज़ को बार बार पढ़ता है, ख़ुद से पूछता है- दिल की पीड़ा कागज़ पर आईना बनकर उतरी या नहीं? इस क्रम में शब्दों को काटता-छांटता और जोड़ता है। जैसे दर्ज़ी, एक सुंदरी के लिए पोशाक तैयार कर रहा हो। बस उसकी कविता विश्व-सुंदरी बन जाए, महफ़िल में खूब वाह-वाही लूटे; उसके दिल की बात लोगों के दिलों को छू ले। लेकिन कविता सुनाने के क्रम में दूसरों की कविता पहले सुननी पड़ती है। वो अपनी सुना कर भाग खड़े होते हैं, अरे नंबर जो देर से आया। मन की पीड़ा को कागज़ पर उतार तो लिया, लेकिन मन में नई पीड़ा उभरने लगी। भाई थोड़ा तो रुक जाते, हमारी भी सुन लेते, यूँ छोड़ के ना जाओ!

कवि को आशावादी होना चाहिए, वो भी इस आधुनिक युग में, जब इंसान अपने ही जैसे स्मार्ट मशीन बना सकते हैं।अंग्रेजी नाम है artificial intelligence, वैसे कवि की कल्पना के परे कुछ भी नहीं है। जहाँ न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि। आपने ChatGPT के बारे में नहीं सुना होगा, अगर आपको कविता सुनाने का मौक़ा महफ़िल में नहीं मिल पाया हो, तो निराश न हों। बस ChatGPT पर अपनी कविता कह दीजिये।कंप्यूटर बड़े प्रेम से आपकी कविता सुन समझ कर, कविता का सारांश बता देगा।

अरे सारांश पढ़ते ही आप तो गदगद होगए। किसी ने तो इतने ध्यान से आपको सुना, और कविता का सार भी समझा दिया। कविराज अपनी पीठ ख़ुद थपथपा लीजिये और ChatGPT को शुक्रिया कहना न भूलियेगा।

 

वैसे मैंने अपना परिचय तो अभी तक नहीं बताया, आप कहीं chatGPT का प्रचारक न समझ लें। टेक्नोलॉजी के सहारे ही रोज़ी रोटी का इंतज़ाम दो दशकों से हो रहा है।इस उम्र में थोड़ा साहित्य से प्रेम जगा तो है। सोचा टेक्नोलॉजी और सहित्य के बीच की कड़ी बनकर थोड़ा ज्ञान साझा करूँ।उम्मीद है आप बोर नहीं हुए होंगे।

ख़लीक़

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