दिल तो है

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धन्नो के लिए आज का दिन अच्छा था. अकेलापन और खामोशी की जैसे आदत सी हो गई हो. सुबह हई, तो खिड़की से झील की सफ़ेद चादरों को देख, इशारों इशारों में सही, झील से बातें करना. एकांत में, कोई तो है, जिनसे बिना कुछ कहे, कुछ कह लेती है.धन्नो बोल पड़ी,झील, हमारा तुम्हारा दर्द एक सा ही हैना। मौसम की मार ने कितना तनहा कर दिया हमें. झील ने कहा अपना ग़म बस अपना होता है, लेकिन कोई साथ हो तो ढारस रहता है, की बस मैं ही तो नहीं. वक़्त है गुज़र ही जायेगा. ग़ालिब का क़ौल याद आगया “जब ख़ुशी ही न ठहरी तो ग़म की क्या औक़ात“

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लाल जरसी

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शौक़ किसी भी शग़ल का हो उसमे महू होना ज़रूरी होता है. Biking यानी साइकल चलाने का शौक़ बचपन से है. वैसे बचपन में साइकल चलाना मजबूरी थी. फ़क़त यही सवारी थी जो हमें स्कूल या बाज़ार ले जाती थी.…

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जो वादा किया

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कौन कहता है सिर्फ सजने संवरने का शौक़ औरतों को ही होता है. अगर आपको यूँ कहूं की हमारी धन्नो भी बहुत शौक़ीन है तो आप यक़ीन करेंगे. लेकिन यह सच है. धन्नो अपने जीवन काल में पुरानी साइकल को…

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