धन्नो के लिए आज का दिन अच्छा था. अकेलापन और खामोशी की जैसे आदत सी हो गई हो. सुबह हई, तो खिड़की से झील की सफ़ेद चादरों को देख, इशारों इशारों में सही, झील से बातें करना. एकांत में, कोई तो है, जिनसे बिना कुछ कहे, कुछ कह लेती है.धन्नो बोल पड़ी,झील, हमारा तुम्हारा दर्द एक सा ही हैना। मौसम की मार ने कितना तनहा कर दिया हमें. झील ने कहा अपना ग़म बस अपना होता है, लेकिन कोई साथ हो तो ढारस रहता है, की बस मैं ही तो नहीं.
वक़्त है गुज़र ही जायेगा. ग़ालिब का क़ौल याद आगया “जब ख़ुशी ही न ठहरी तो ग़म की क्या औक़ात“




आज बेसमेंट में अचानक चहल पहल हो गई. मोहल्ले के 8-10 बच्चे यहां (बेटे के दोस्त ) आ पहुंचे, और पास रखी टेबल पर, टेबल टेनिस खेलने लगे. धन्नो बच्चों के साथ अपने बचपन को याद करने लगी. गांव में गुल्ली डंडा का खेल होता था. जो इस खेल से काफ़ी अलग था. लेकिन बच्चों का उत्साह और शोर बिलकुल वैसा ही. बच्चे तो बच्चे हैं, उनके लिए कोई भी खेल, खेल है.
मैं भी थोड़ी देर में नीचे बेसमेंट में आगया. बच्चों को खेलते देख कर, मैं चुप चाप खड़ा रहा. धन्नो का ध्यान भी खेल की तरफ़ था, इतना की मेरे वहां खड़े होने का एहसास भी नहीं रहा. फिर वहां मुझे प्लास्टिक का क्रिकेट बैट नज़र आया. मैंने ज़ोर से आवाज़ लगाई “anyone wants to play cricket”. आधे बच्चे क्रिकेट खेलने आ गए. बेसमेंट में क्रिकेट, बच्चों के साथ खेलकर हम भी थोड़ी देर के लिए बच्चे बन गए. धन्नो भी हमें घूर के देख रही थी, बोलने लगी बचपन में तुम ऐसे ही बॉलिंग किया करते थे, और मैं मैदान की बॉउंड्री पे खड़ी होकर तुम्हें देखती थी.
जल्द ही शाम होगई पड़ोस के बच्चे अपने घर चले गए, और बेसमेंट फिर ख़ाली होगया. धन्नो कुछ नहीं बोली लेकिन मैं तो धन्नो की हर अदा को भांप लेता हूँ.. मैंने कहा धन्नो अब कोई नहीं है, तो हम और तुम बेसमेंट में ही 10 मिनट बाइक राइड करते हैं. जगह छोटी है तो क्या हुआ, दिल में जगह होनी चाहिये,और हमारा दिल बहुत बड़ा है. धन्नो बोली धीरे बोलो कहीं भाभीजी न सुन लें.. मैं भी मुस्कुराने लगा
चलते चलते एक गाना याद आ गया, दिल तो है दिल, दिल का ऐतबार क्या कीजे……”


👍👍.
Aaeena mjh se meri pehli see soorat maange.
Mera apne mere hone ki nishaani maange.
Har kharidaar ko bazaar me bikta paya.
Humne kya khoya, humne kya paaya