जीवन के आयाम
जीवन में भी कितने आयाम हैं. हर आयाम की अपनी ज़रूरतें हैं उमंगें हैं और ज़िम्मेदारियाँ हैं. हर आयाम को जीतते रहने की भरसक कोशिश को ही जीना कहते हैं. गब्बर का डायलॉग याद आगया "जो डर गया वोह मर…
जीवन में भी कितने आयाम हैं. हर आयाम की अपनी ज़रूरतें हैं उमंगें हैं और ज़िम्मेदारियाँ हैं. हर आयाम को जीतते रहने की भरसक कोशिश को ही जीना कहते हैं. गब्बर का डायलॉग याद आगया "जो डर गया वोह मर…
शाम को ज़रा देर से निकला कोशिश करता हूँ की सबको समय दे पाऊँ, जब मैं वापिस गेराज में आया तो लगा धन्नो मेरी तरफ देख रही हो. उसकी खामोश अदा को मैं नहीं तो कौन समझेगा. मैं ने कहा…
धन्नो की सैर जारी है लेकिन धन्नो को अपने सैर से ज़्यादा अपना ज़िक्र करने और करवाने में मज़ा आता है. कई दिन से कुछ लिखा नहीं तो धन्नो के भाव बदले से थे. Previous Next बोल पड़ी "आजकल अपनी…