तीन चेहरे
तीन के ख़ुमार में खो ही गया, जैसे रात को भी सपने आने लगे. मैंने देखा धन्नो अकेली मिसिसिपी नदी के किनारे ट्रेल पर खड़ी है. ट्रेल पर दूर-दूर तक कोई नहीं है, और तीन रंगीले जवान धन्नो को घेरे हुए हैं. मैं अकेला, कैसे तीन का मुक़ाबला करूँ! अगर मिसिसिपी की जगह गंगा मईया होती तो उन्हें अकेली धन्नो पर ज़रूर तरस आता, कोई न कोई चमत्कार होता. धन्नो का नाम भी थोड़ा अलग है, रज़िया रखता तो अच्छा था. ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगा सकते थे, रज़िया गुंडों में फँस गई है. सुनते ही रज़िया को बचाने वालों की लाइन लग जाती. लेकिन ये सब सोच कर क्या फ़ायदा! धन्नो का नाम भी अनोखा है, और प्यार में भी धोखा है. वो कैसा प्रेमी जो उसकी रक्षा न कर सके, बस चमत्कार के भरोसे मिसिसिपी नदी की ओर देखे जा रहा है.......

