तीन चेहरे

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तीन के ख़ुमार में खो ही गया, जैसे रात को भी सपने आने लगे. मैंने देखा धन्नो अकेली मिसिसिपी नदी के किनारे ट्रेल पर खड़ी है. ट्रेल पर दूर-दूर तक कोई नहीं है, और तीन रंगीले जवान धन्नो को घेरे हुए हैं. मैं अकेला, कैसे तीन का मुक़ाबला करूँ! अगर मिसिसिपी की जगह गंगा मईया होती तो उन्हें अकेली धन्नो पर ज़रूर तरस आता, कोई न कोई चमत्कार होता. धन्नो का नाम भी थोड़ा अलग है, रज़िया रखता तो अच्छा था. ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगा सकते थे, रज़िया गुंडों में फँस गई है. सुनते ही रज़िया को बचाने वालों की लाइन लग जाती. लेकिन ये सब सोच कर क्या फ़ायदा! धन्नो का नाम भी अनोखा है, और प्यार में भी धोखा है. वो कैसा प्रेमी जो उसकी रक्षा न कर सके, बस चमत्कार के भरोसे मिसिसिपी नदी की ओर देखे जा रहा है.......

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मैं समय हूँ

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"मै समय हूँ, मेरा कोई अंत नहीं" महाभारत के टीवी सीरियल की यह आवाज़ अब भी कानों में गूंजती है. समय रुकता नहीं, लेकिन शनिवार रात सात सात घड़ियों की सुई को रोक कर पीछे कर रहा था. हर घड़ी की सुई एक घंटा पीछे कर असीम दैवी शक्ति का आभास हो रहा था , जैसे समय पर मेरा अधिकार हो.

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दाग़

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दाग़ कितना भी छोटा हो, अपनी पहचान बनाए रखता है. नज़र उतारने वाला काला टीका अलग था, वो जो मां बचपन में नज़र उतारने के लिए रोज़ सुबह लगाती थी. शाम होते होते टीका कहीं ग़ायब हो जाता. टीका मिटकर मां को यक़ीन दिला जाता की उसने दिन भर हिफाज़त की, बच्चा हंसता खेलता रहा. दाग़ अपनी जगह ख़ुद चुन लेता है, अपनी सहूलियत से. जाने अनजाने में आप दाग़ के लिए रास्ता बना देते हैं. जो बोया है वो ही उगेगा, नियम ऊपर वाले ने बनाया है. दाग़ अपने आप उभर आता है. ...

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