गंगा जल

  • Post category:Hindi
  • Post comments:1 Comment

धन्नो आज 15 मील भाग कर थक सी गई, फ़व्वारे के पास आकर रुक गई. पानी के छींटे उड़ कर धन्नो को छू रहे थे. धन्नो को भी जैसे भीगने का मौक़ा मिल गया हो. मैंने कहा - "धन्नो तू बस फ़व्वारे को देख कर रुकी थी! मुझे तो लगता है तू भी अब धार्मिक प्रवृत्ति की होती जा रही है". "कभी-कभी तुम भी ना! बेतुकी बातें करते हो; तुम्हें पता है ना, मैं नास्तिक हूँ".

Continue Readingगंगा जल

बुलडोज़र जी

थोड़ा ठहरो, मुझे भी आज मन की बात कहनी है". "क्यों हम साथ-साथ रफ़्तार में भागते हुए बातें कर सकते हैं." "अरे, वो मुझे भी पता है. मैं तो बुलडोज़र जी से बात करना चाहती हूँ. वो देखो साक्षात दर्शन हो गया उनका!" धन्नो "तेरा इस तरह गैरों से बात करना, मुझे अच्छा नहीं लगता" "अरे तुम आज इतने मीन माइंडेड क्यों हो रहे हो, तुम भी तो सामने से आती हुई बाइकर को दूर से ही हँस कर हेल्लो कहते हो, और मौक़ा मिलते ही, बातें करने लग जाते हो!" "तू भी न धन्नो, इतनी सी बात पर ख़फ़ा होने लगती है, जा बुलडोज़र जी से, जी भरकर मन की बात कर ले"

Continue Readingबुलडोज़र जी

पिक्चर परफेक्ट

  • Post category:Hindi
  • Post comments:0 Comments

कायनात की ख़ूबसूरती को आप कितनी ही खूबसूरती से बयां करना चाहें, अधूरा ही रह जाता है. इंसान के शब्दों में वो करिश्मा कैसे आ सकता है जो क़ुदरती हुस्न को हु बहु उतार सके. सुबह के चार बजे, चाँद दरीचे से झांक रहा था. हम एक टक देखने लगे, सोचा इस पल को क्यों न कैमरे में क़ैद करलें. आइ -फ़ोन कैमरे के साथ जुस्तुजू में लग गया, हू बहू चाँद को उतार सकूँ. कैमरा अच्छा नहीं था, कहना आसान होगा. लेकिन अगर कैमरा-मैन, फोटोग्राफी की अदा जानता तो बात थोड़ी सच लगती. कहते हैं न, नाच न जाने आँगन टेढ़ा.

Continue Readingपिक्चर परफेक्ट