चोर बोले ज़ोर से

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देर रात नींद का खुलना एक आम सी बात है, लेकिन फिर नींद का न आना बेचैन करता है. बिस्तर पर पड़े रहकर, लेटे रहने का बहाना करें. या फिर उठकर, समय का सदुपयोग. लेकिन. ये डर भी लगा रहता है की, क़दमों की आहट. या हॉल में बल्ब जलाने से, किसी की नींद न ख़राब हो जाए. दबें पांव चलकर ऐसा लगता है, जैसे कोई चोर घुस आया हो. लेकिन अपने ही घर में ख़ुद को चोर बुलाना शायद अनुचित होगा. अगर हमारी हरकतों की वजह से कोई जग भी गया तो कह देंगे , "हाँ मैं, हूँ नींद खुल गई थी"

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बदलाव (Change)

जब कुछ नया करने का हो ख्याल फिर मन मेँ आजाते हैं कई सवाल मैंने कभी किया नहीं, क्या हो पाएगा दायरे से बहार छलांग लगा पायेगा आत्म विश्वास कहता हाँ होजायेगा हिम्मते मरदा मदददे ख़ुदा, होजायेगा फिर आवाज़ आइ…

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दिल तो है

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धन्नो के लिए आज का दिन अच्छा था. अकेलापन और खामोशी की जैसे आदत सी हो गई हो. सुबह हई, तो खिड़की से झील की सफ़ेद चादरों को देख, इशारों इशारों में सही, झील से बातें करना. एकांत में, कोई तो है, जिनसे बिना कुछ कहे, कुछ कह लेती है.धन्नो बोल पड़ी,झील, हमारा तुम्हारा दर्द एक सा ही हैना। मौसम की मार ने कितना तनहा कर दिया हमें. झील ने कहा अपना ग़म बस अपना होता है, लेकिन कोई साथ हो तो ढारस रहता है, की बस मैं ही तो नहीं. वक़्त है गुज़र ही जायेगा. ग़ालिब का क़ौल याद आगया “जब ख़ुशी ही न ठहरी तो ग़म की क्या औक़ात“

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