चोर बोले ज़ोर से
देर रात नींद का खुलना एक आम सी बात है, लेकिन फिर नींद का न आना बेचैन करता है. बिस्तर पर पड़े रहकर, लेटे रहने का बहाना करें. या फिर उठकर, समय का सदुपयोग. लेकिन. ये डर भी लगा रहता है की, क़दमों की आहट. या हॉल में बल्ब जलाने से, किसी की नींद न ख़राब हो जाए. दबें पांव चलकर ऐसा लगता है, जैसे कोई चोर घुस आया हो. लेकिन अपने ही घर में ख़ुद को चोर बुलाना शायद अनुचित होगा. अगर हमारी हरकतों की वजह से कोई जग भी गया तो कह देंगे , "हाँ मैं, हूँ नींद खुल गई थी"

