बुलडोज़र जी
थोड़ा ठहरो, मुझे भी आज मन की बात कहनी है". "क्यों हम साथ-साथ रफ़्तार में भागते हुए बातें कर सकते हैं." "अरे, वो मुझे भी पता है. मैं तो बुलडोज़र जी से बात करना चाहती हूँ. वो देखो साक्षात दर्शन हो गया उनका!" धन्नो "तेरा इस तरह गैरों से बात करना, मुझे अच्छा नहीं लगता" "अरे तुम आज इतने मीन माइंडेड क्यों हो रहे हो, तुम भी तो सामने से आती हुई बाइकर को दूर से ही हँस कर हेल्लो कहते हो, और मौक़ा मिलते ही, बातें करने लग जाते हो!" "तू भी न धन्नो, इतनी सी बात पर ख़फ़ा होने लगती है, जा बुलडोज़र जी से, जी भरकर मन की बात कर ले"

