बुलडोज़र जी

थोड़ा ठहरो, मुझे भी आज मन की बात कहनी है". "क्यों हम साथ-साथ रफ़्तार में भागते हुए बातें कर सकते हैं." "अरे, वो मुझे भी पता है. मैं तो बुलडोज़र जी से बात करना चाहती हूँ. वो देखो साक्षात दर्शन हो गया उनका!" धन्नो "तेरा इस तरह गैरों से बात करना, मुझे अच्छा नहीं लगता" "अरे तुम आज इतने मीन माइंडेड क्यों हो रहे हो, तुम भी तो सामने से आती हुई बाइकर को दूर से ही हँस कर हेल्लो कहते हो, और मौक़ा मिलते ही, बातें करने लग जाते हो!" "तू भी न धन्नो, इतनी सी बात पर ख़फ़ा होने लगती है, जा बुलडोज़र जी से, जी भरकर मन की बात कर ले"

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पिक्चर परफेक्ट

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कायनात की ख़ूबसूरती को आप कितनी ही खूबसूरती से बयां करना चाहें, अधूरा ही रह जाता है. इंसान के शब्दों में वो करिश्मा कैसे आ सकता है जो क़ुदरती हुस्न को हु बहु उतार सके. सुबह के चार बजे, चाँद दरीचे से झांक रहा था. हम एक टक देखने लगे, सोचा इस पल को क्यों न कैमरे में क़ैद करलें. आइ -फ़ोन कैमरे के साथ जुस्तुजू में लग गया, हू बहू चाँद को उतार सकूँ. कैमरा अच्छा नहीं था, कहना आसान होगा. लेकिन अगर कैमरा-मैन, फोटोग्राफी की अदा जानता तो बात थोड़ी सच लगती. कहते हैं न, नाच न जाने आँगन टेढ़ा.

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तीन चेहरे

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तीन के ख़ुमार में खो ही गया, जैसे रात को भी सपने आने लगे. मैंने देखा धन्नो अकेली मिसिसिपी नदी के किनारे ट्रेल पर खड़ी है. ट्रेल पर दूर-दूर तक कोई नहीं है, और तीन रंगीले जवान धन्नो को घेरे हुए हैं. मैं अकेला, कैसे तीन का मुक़ाबला करूँ! अगर मिसिसिपी की जगह गंगा मईया होती तो उन्हें अकेली धन्नो पर ज़रूर तरस आता, कोई न कोई चमत्कार होता. धन्नो का नाम भी थोड़ा अलग है, रज़िया रखता तो अच्छा था. ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगा सकते थे, रज़िया गुंडों में फँस गई है. सुनते ही रज़िया को बचाने वालों की लाइन लग जाती. लेकिन ये सब सोच कर क्या फ़ायदा! धन्नो का नाम भी अनोखा है, और प्यार में भी धोखा है. वो कैसा प्रेमी जो उसकी रक्षा न कर सके, बस चमत्कार के भरोसे मिसिसिपी नदी की ओर देखे जा रहा है.......

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