मेरी साइकल
तस्वीर का सहारा लेना मेरी आदत बनती जा रही है, बात जो कहनी है उसे कहना इतना मुश्किल होता है क्या. मेरे जैसे लेखक के लिए यह उत्तर के लिए "हाँ" बोलना ही होगा. शायद यही "सही जवाब" होगा. सही…
तस्वीर का सहारा लेना मेरी आदत बनती जा रही है, बात जो कहनी है उसे कहना इतना मुश्किल होता है क्या. मेरे जैसे लेखक के लिए यह उत्तर के लिए "हाँ" बोलना ही होगा. शायद यही "सही जवाब" होगा. सही…
सुबहसवेरा होगया हाँ काली रात के बाद की सुबह अंधकार को मिटाती हुई, नई आशा और उम्मीदों के साथ. रविश कुमार जैसी तस्वीर शब्दों में बयां करना अलौकिक है, मुझे तो तस्वीर का सहारा चाहिए. टहलने के लिए निकला था…
मैं फिर से अपने साइकल सवारी की कहानी सुनाने आगया. कुछ कहना अच्छा है, कोरोना काल ने हम सबको unsocial बनने का पूरा बहाना दे दिया है. लेकिन इस "कोरोना के रोना" को नकारना होगा, मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है,…