तस्वीर का सहारा लेना मेरी आदत बनती जा रही है, बात जो कहनी है उसे कहना इतना मुश्किल होता है क्या. मेरे जैसे लेखक के लिए यह उत्तर के लिए “हाँ” बोलना ही होगा. शायद यही “सही जवाब” होगा. सही जवाब सुनके एकदम से “बिग बी” याद आ गए, सालों पहले उनका “कौन बनेगा करोड़पति” वाला “सही जवाब” कहने का अद्भुत अंदाज़, कितना निराला था, उस निरालेपन ने उनके जीवन में भी एक नई उमंग और आशा की किरण जगा दी थी. कहते हैं सदी के महानायक उस समय आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे थे, और Sony TV के इस प्रोग्राम से उनके जीवन को एक नया आयाम मिला था. छमा का प्रार्थी हूँ अगर मेरी जानकारी अधूरी है तो.
आपने, शायद अभी तक एक शब्द पे धयान नहीं दिया, मैं खुद को “लेखक” की उपाधि दे रहा हूँ. यह भी बेतुका भरा अंदाज़ है, खुद की ही पीठ थपथपाना, लेकिन क्या करूँ गलती तो होगई. अब इस बात पे आप तो थोड़ा नंबर दे ही देना
की ईमानदारी से अपनी बात बता दी, और सदी के महानायक का नाम लेकर खुद को नहीं बचाया.
बात लिखते लिखते तस्वीर के बारे में भूल गया. साइकिल की सवारी के लिए निकला था, आम बोलचाल की भाषा में biking work-out भी कहते हैं. पांच mile चला कर थोड़ा थक गया था, सोंचा रुक कर सुस्ता लूँ, पानी पी लूँ. बेंच पे बैठ गया पेड़ के निचे, ठंडी हवा चल रही है. सामने कुछ बच्चे (एक ही परिवार के लगते हैं) Base-ball खेल रहे हैं जो Cricket से मिलता जुलता होता है. खेल देख कर cricket की याद क्यों ना आये. लेकिन यादों में जीना एक बोझ सा लगता है. सारा बोझ उतार कर वर्तमान में दौड़ना चाहता हूँ उस सुनहरे भविष्ये के लिए. वैसे चलते चलते बतादूँ के मेरा 16 वर्षीय बेटा base-ball खेलता है और उस से ही मैंने इस खेल के बारे में काफी कुछ सीखा है.
लिखते हुए भूल गया की मैं बाइकिंग करने निकला था, अभी 5 मील और जाना है. वर्त्तमान में जीकर तेज़ भागना है.अपनी साइकल पर भारोसा है, मेरा 10 मिल का लक्ष पूरा कराके ही दम लेगी, बिलकुल शोले फ़िल्म में हेमा-मालिनी की धन्नो की तरह
वैसे बातें करके अच्छा लगा उम्मीद है आप बोर नहीं हुए होंगे.


Khalique bhai app lekhak bangaye ho , bahot khub