पेंटिग

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रंगों का मेल, और भी रंगीन हो जाता है. ख़ामोश रहके भी, बहुत कुछ कहता है. कहने की भी अपनी कला है. ज़ुबान के बिना, बोलना, आसान नहीं होता. उसको समझना भी, आसान नहीं होता. अनकही बातों को, समझ लेना…

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नाराज़ धन्नो

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धन्नो के लिए आज का दिन अच्छा था. अकेलापन और खामोशी की जैसे आदत सी हो गई हो. सुबह हई, तो खिड़की से झील की सफ़ेद चादरों को देख, इशारों इशारों में सही, झील से बातें करना. एकांत में, कोई तो है, जिनसे बिना कुछ कहे, कुछ कह लेती है.धन्नो बोल पड़ी,झील, हमारा तुम्हारा दर्द एक सा ही हैना। मौसम की मार ने कितना तनहा कर दिया हमें. झील ने कहा अपना ग़म बस अपना होता है, लेकिन कोई साथ हो तो ढारस रहता है, की बस मैं ही तो नहीं. वक़्त है गुज़र ही जायेगा. ग़ालिब का क़ौल याद आगया “जब ख़ुशी ही न ठहरी तो ग़म की क्या औक़ात“

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धन्नो (Bike series 3)

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धन्नो के लिए येह साल बड़ा ही खुशियों भरा है. वह अकेली नहीं, अब अपने रंग बिरंगे साथियों के साथ ट्रेल पे रफ़्तार से दौड़ती है.यूँ तोकोरोना का रोना थमने का नाम नहीं ले रहा, लेकिन धन्नो को इसका फ़ायदा…

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