सोंच और सपने

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धन्नो आज थोड़ी भावुक सी थी मेरे लिए नहीं मेरी परछाई के लिए.. बोल पड़ी "एक फोटो खींच दो जिसमें मैं और बस तुम्हारी परछाई हों ". कई दिनों बाद तेज़ धुप निकली और धन्नो परछाही को देख कर एकदम…

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लम्बी परछाई

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धन्नो धनवान हो गई, यूँ तो इंसान के चश्में से देखें, तो धनवान होने का शाब्दिक अर्थ खूब सारा रुपया पैसा अर्जीत कर लेना है. मुझ जैसे स्वार्थी का चश्मा बस यही रंग देखने लगा है. जिसने 8 साल से…

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खंजर

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सरदी का मौसम, और दिसंबर का महीना, बहते पानी को भी रोक देता है. जमा हुआ पानी बर्फ़ बनने लगता है. मैं बर्फ़ बनगई, थम गई. फिर भी, कभी कभी चहल पहल होती है. जमी हुई बर्फ़ और सर्द हवा,…

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