लम्बी परछाई

धन्नो धनवान हो गई, यूँ तो इंसान के चश्में से देखें, तो धनवान होने का शाब्दिक अर्थ खूब सारा रुपया पैसा अर्जीत कर लेना है. मुझ जैसे स्वार्थी का चश्मा बस यही रंग देखने लगा है. जिसने 8 साल से अपना जीवन एक ऐसे संसथान में लगाया, जहाँ कागज को डालर में तब्दील किया जाता है. हमारी धन्नो पे, हमारे रंग का, कोई असर नहीं है. अनजान है, बेजान होने का कुछ तो फ़ायदा है, इसको.

धन्नो स्वार्थी नहीं, लेकिन थोड़ी शरारती सी लग रही थी. कल मौसम अचानक मेहरबान हो गया. ग्लोबल वार्मिंग की बात कर सकते हैं, लेकिन नकारात्मक बात को विराम देकर, थोड़ा धन्नो की चुलबुलि हरकतों का ज़िक्र करें. कल धन्नो पहली बार इतनी दूर, 8 मील, हमारे साथ भागी. थोड़ी दूर तक हम, धन्नो, और हमारी परछाई, साथ साथ थे. धन्नो बोली भगवान को धन्यवाद कहदूँ. हम तीनों, फिर साथ आ गये, नहीं तो सर्दी के मौसम में, कभी तुम बिलकुल अकेले, या फिर तुम और मैं, लेकिन धुप की कमी से परछाई तो गायब ही थी. आज “हम तीन” एक साथ होकर “पुरे” होगये, और मैं, “धनवान” होगई.

धन्नो को फिर अचानक अपनी सहेली “सैली” का ख्याल आया, कहने लगी, उस से मिलने का बड़ा दिल कर रहा है. सैली को, धन्नो ने पिछले साल कोरोना काल में ही दोस्त बनाया था. मैंने बोला धन्नो समय के साथ बदलाव भी आता है. याद है, सैली कितनी शान से नई नवेली दुल्हन की तरह Tesla कार के पीछे लेट के आई थी, ट्रेल पे. मेरे पास तो बस एक Tesla ब्रांड की जैकेट है, जो बाइकिंग में सर्द हवा से बचाती है. फिर ठण्ड में भी हम दोनों ट्रेल पे तेज़ भागते हैं. धन्नो से सुना न गया, गुस्सा हो गई, बोली “तुम इंसानों की नकारात्मक सोंच तुमको मुबारक मुझ से ऐसी बातें ना किया करो”.

मैं थोड़ा चुप होगया,पत्नी की डांट, तो हर कोई सुनता है. आज धन्नो को भी सुन लूँ, हमारे जीवन में धन्नो का बड़ा योगदान है. मैंने सैली के मालिक को फ़ोन घुमा ही दिया. दिल से दिल को राह होती है. पता चला सैली भी पहली बार आज ट्रेल पे सैर को गई है, और थोड़ी देर में हम साथ साथ bike ride कर सकते हैं. धन्नो के ख़ुशी का ठिकाना न था, मानो भगवान ने छप्पड़ फाड़ के खुश्याँ, धन्नो की झोली में डाल दी हो. धन्नो भागती हुई गैस स्टेशन के पास आके सैली का इंतज़ार करने लगी. आख़री बार, पिछले साल नवंबर में, धन्नो और सैली यहीं पर मिले थे.

धन्नो खुश थी की आज अक्समात ही सैली से मुलाक़ात हो गई. साथ साथ घंटी को “टून टून” कर तेज़ भागने लगी. हम बस इनकी बातें सुन रहे थे की अचानक मेरा फ़ोन धन्नो के हैंडल से निचे गिरा. धन्नो iPhone के ऊपर चढ़ गइ, तेज़ रफ़्तार को रोक नहीं सकी. लेकिन फ़ोन को कुछ भी नहीं हुआ, मैंने भी गर्व से कहा “धन्नो ये हमारे मेहनत की कमाई का है”. देखते देखते सैली का कब घर आगया पता ही नहीं चला. धन्नो खुश थी की सैली से अक्सर मिला करेगी.

धन्नो को अपने घर, वापिस, अकेले जाना था. शाम ढल रही थी, और हम अपनी रफ़्तार से वापिस आ रहे थे. सूरज ढलने वाला था, धन्नो एकांत मिटाने के लिए मुझ से बोल पड़ी, “देखो तुम्हारी परछाई लम्बी होगई है, तुम्हारा क़द बड़ा होगया है”. मैंने बोला “धन्नो हमारी पत्नी हमें अक्सर कहती है, आप हमसे बस 2 इंच लम्बे हैं, शादी के बाद अपने लम्बे हील वाले सैंडल और जुते मैं अपने माइके में ही छोड़ आई, आप और लम्बे होते तो मैं पहनती”. धन्नो बोली “यह तो भाभी जी का तुम्हारे लिए त्याग और सम्मान हैं”.

“रौशनी के सिम्त से परछाई तो लम्बी हो सकती है. लेकिन हमारी उम्र में, आदमी कभी लम्बा नहीं होता धन्नो”, यह सुनके धन्नो हंस कर बोली, “ठीक कहा, लेकिन मैंने तो युहीं मज़ाक़ किया था”. ट्रेल पे कहीं कहीं धुप नहीं पड़ती है, कहीं थोड़ी नीची होने से रस्ते की बर्फ पिघल कर पानी जमा होगया था. मुझे अपने बचपन के शहर दरभंगा की याद आगयी. वहां बरसात के बाद, सड़क पर छोटे गधे हो जाते हैं, और उनपे पानी भरा होता. हर सवारी संकीर्ण सड़क को साझा करती है. हमारी Atlas साइकिल, उस गधे को बड़ी शान से पार कर लेती थी. मैं धन्नो को महसूस कर पा रहा था, अकेले ट्रेल पे उसका राज था. फिर भी पानी भरे रास्ते से पास करते हुए वो धीरे हो जा रही थी. मैंने धन्नो से कहा Atlas साइकिल से TREK Bike बनने में कितना कुछ बदलगया धन्नो. धन्नो शायद समझ नहीं पाई.

सूरज ढलने से पहले घर पहुंचना था. धन्नो की लम्बी परछाई वाली बात सोंच रहा था, “रौशनी से परछाही लम्बी होने का भरम ऐसा ही है जैसे, वक़्त और हालत के उपरोक्त होने पे आदमी तरक़्क़ी की पायदान पे चढ़ कर खुद को ऊँचा समझने लगता है”..शायद धन्नो हमें यही बताना चाह रही थी… लेकिन धन्नो भी पानी भरे रास्ते में धीरे हो गई..येह सब सोंचते हुए घर कब आगया पता ही नहीं चला…

This Post Has 2 Comments

  1. Mahtab

    Very nicely written Khalique. You have a natural talent in capturing little things in life. Keep on writing!!

    1. Khalique Wajidi

      Thank you for taking time and providing your feedback, It means a lot for me… will keep writing

Leave a Reply