चांद

कवि की टोपी उतार कर छायाकार की टोपी पहन ली. ऐसा लगा जैसे वेजेटेरियन हो गए. हसीनाओं को सपनों में नहीं साक्षात् दर्शन कर कैनवास पर उतारूंगा. ऐसे में वेजेटेरियन बने रहना अच्छा है, वर्ना मनचला कवि कहेगा बिरयानी लाओ, मतलब हसीना मान जाओ कैनवास से बाहर आओ. छायाकार आसमान में चौदहवीं के चाँद की ओर देखे जा रहा था. ध्यान लगा कर शॉट लेता रहा. हू बहू चाँद को क़ैद कर लेने की आस. वहीं मनचला कवि चाँद को ख्यालों में, हसीना के क़दमों में डालने की बातें करने लगा. छायाकार बोला पहले चाँद को आसमान से तो उतारने दो कविराज, मेरे कैनवास और तुम्हारी हसीना के क़दमों तक ले जाने की बात को थोड़ी देर के लिए विराम देते हैं.

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गंगा जल

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धन्नो आज 15 मील भाग कर थक सी गई, फ़व्वारे के पास आकर रुक गई. पानी के छींटे उड़ कर धन्नो को छू रहे थे. धन्नो को भी जैसे भीगने का मौक़ा मिल गया हो. मैंने कहा - "धन्नो तू बस फ़व्वारे को देख कर रुकी थी! मुझे तो लगता है तू भी अब धार्मिक प्रवृत्ति की होती जा रही है". "कभी-कभी तुम भी ना! बेतुकी बातें करते हो; तुम्हें पता है ना, मैं नास्तिक हूँ".

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बुलडोज़र जी

थोड़ा ठहरो, मुझे भी आज मन की बात कहनी है". "क्यों हम साथ-साथ रफ़्तार में भागते हुए बातें कर सकते हैं." "अरे, वो मुझे भी पता है. मैं तो बुलडोज़र जी से बात करना चाहती हूँ. वो देखो साक्षात दर्शन हो गया उनका!" धन्नो "तेरा इस तरह गैरों से बात करना, मुझे अच्छा नहीं लगता" "अरे तुम आज इतने मीन माइंडेड क्यों हो रहे हो, तुम भी तो सामने से आती हुई बाइकर को दूर से ही हँस कर हेल्लो कहते हो, और मौक़ा मिलते ही, बातें करने लग जाते हो!" "तू भी न धन्नो, इतनी सी बात पर ख़फ़ा होने लगती है, जा बुलडोज़र जी से, जी भरकर मन की बात कर ले"

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