चांद
कवि की टोपी उतार कर छायाकार की टोपी पहन ली. ऐसा लगा जैसे वेजेटेरियन हो गए. हसीनाओं को सपनों में नहीं साक्षात् दर्शन कर कैनवास पर उतारूंगा. ऐसे में वेजेटेरियन बने रहना अच्छा है, वर्ना मनचला कवि कहेगा बिरयानी लाओ, मतलब हसीना मान जाओ कैनवास से बाहर आओ. छायाकार आसमान में चौदहवीं के चाँद की ओर देखे जा रहा था. ध्यान लगा कर शॉट लेता रहा. हू बहू चाँद को क़ैद कर लेने की आस. वहीं मनचला कवि चाँद को ख्यालों में, हसीना के क़दमों में डालने की बातें करने लगा. छायाकार बोला पहले चाँद को आसमान से तो उतारने दो कविराज, मेरे कैनवास और तुम्हारी हसीना के क़दमों तक ले जाने की बात को थोड़ी देर के लिए विराम देते हैं.

