सुबह

सुबहसवेरा होगया हाँ काली रात के बाद की सुबह अंधकार को मिटाती हुई, नई आशा और उम्मीदों के साथ. रविश कुमार जैसी तस्वीर शब्दों में बयां करना अलौकिक है, मुझे तो तस्वीर का सहारा चाहिए. टहलने के लिए निकला था फ़ोन से यह तस्वीर खिंच ली. बड़ा ही सुना सा लग रहा है, दूर दूर तक कोई नहीं है. सन्नाटे के बीच कोयल की आवाज़ बहुत प्यारी है, साथ में हम दोनों तेज़ क़दमों से walk कर रहे हैं. पत्नी का ध्यान स्मार्ट वाच पे है तेज़ चलने को कह रही हैं. मैं तो यादों में खोया हूँ अपने शहर की सुबह को ढूंढ रहा हूँ. वही सुबह जो रविश कुमार ने अपने facebook पोस्ट में बयान किया था मानों सबकुछ हमारे नज़रों के सामने हो.

तस्वीर बयान करने में एक बात कहना भूल गया यह Minneapolis की तस्वीर है. हाँ ठीक समझा वही शहर जो महीने पहले अपने कारणों से ख़बरों में था. जहाँ एक अश्वेत युवा George Floyd की police नें अरेस्ट करने के दौरान बर्बरता की थी, और उनकी जान चली गई. हर अमेरिकी और मानवता से प्यार करने वाले लोगों को इसका दुःख है. अपने शहर में इस घटना से मैं भी बहुत आहत हुआ था.. दो बार विरोध प्रदर्शन में भी गया. जीवन के 14 अनमोल साल इस शहर में बिता, पराये शहर ने हमें अपनाया तो हमभी इसे अपना कहने में क्यों संकोच करें.

जीवन आगे बढ़ता है बदलाव के साथ change is only constant अपना वो शहर जहाँ बचपन बिता उसको यादों में अपना कह लेता हूँ. दो तीन साल में अपने बचपन के शहर दरभंगा जाता हूँ. वहां भी सुबह मीलों पैदल चलता हूँ.. उस दुकान के पास से भी गुज़रता जहाँ 25 पैसे के choclate लेता था . रहमत भाई के बाल सफ़ेद होगये चेहरे पे झुर्रियां आ गई हैं, लेकिन मिलके बहुत खुश हो जाते हैं दुआ देते हैं. दर्ज़ी की दुकान से गुज़रा, बचपन में कपड़े सिलवाता था. सब मिलके भावुक हो जाते हैं. मैं भी सोंचने लगता हूँ येह हमारे अपने थे , लेकिन समय की धारा के साथ “यादों” को भूलना अच्छा होता है. जीवन गति का नाम है और रफ़्तार में आगे ही देखना चाहिए, पीछे मुड़े तो दुर्घटना हो सकती है.

लेकिन बात तो कहनी जरुरी है, बचपन के शहर की युवा पीढ़ी से एकदम अनजान होगया. बच्चे और युवा देखते तो हैं लेकिन मानो कह रहे हों येह अजनबी कौन है. कभी कोई पूछने भी लगता है, की आप कौन हैं. बहुत कष्ट होता है यह सोंच कर हज़ारों मिल का सफर करके अजनबी होने का एहसास. सवाल कांटे कि तरह शरीर को चुभ जाता है सोंचने लगता हूँ कैसे अपना परिचय कराउं , थोड़ा चुप हो जाता हूँ उतने में मेरा भाई बोलता है. यही मेरे भाई हैं जो America में रहते हैं, फिर मुझे आगे कुछ कहने का मन नहीं करता.

किसको दोष दूँ युवा को उसकी क्या गलती है, खुदको या जीवन की धारा को, परिवर्तन तो संसार का नियम है, तो इसमें इतना दुखी होने वाली बात क्या है. बचपन के दोस्त शहर में अब भी हैं, लेकिन वोह सड़क पे क्रिकेट खेलने वाले बच्चे नहीं ,शहर के मशहूर डॉक्टर हैं शिशु विशेषज्ञ और जनरल सर्जन. मानवता की सेवा और अपनी दिन चर्या में लगे हैं. सभों से मिलने की कोशिश करता हूँ, लेकिन समय की कमी और उनका व्यस्त जीवन हमारे बीच आजाता है. अगली बार गया तो उनके क्लिनिक पे जाऊंगा फीस दूंगा फिर उनका समय मांगूंगा, अच्छा है अजनबी होने का फ़ायदा मिलेगा compounder तो नहीं पहचाने गा.

मैंने लेख तो सुबह पे शुरू किया था, अपने बचपन के शहर की सुबह को याद कर आपको बोर करदिया. यह तो अच्छा नहीं है, लेकिन दिल का बोझ हल्का होगया सोचा था कभी तो लिखूंगा, भारत से दूर भारत को अपने दिल में लिए हम सब घूमते हैं. इसका कोई प्रमाण देना जरुरी नहीं है.. यह लेख में भारत की मिट्टी की सुगंध महसूस करें… बचपन की सुबह याद आती रहेगी.

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