दस मिनट देर

धन्नो की सैर जारी है लेकिन धन्नो को अपने सैर से ज़्यादा अपना ज़िक्र करने और करवाने में मज़ा आता है. कई दिन से कुछ लिखा नहीं तो धन्नो के भाव बदले से थे.

बोल पड़ी “आजकल अपनी क़लम के क़सीदे ही पढ़ रहे हो, क़लम से बस क़लम को ही लिख रहे हो, तुम्हारी क़लम का रूप स्वार्थी लगने लगा है. अपनी धन्नो के बारे में लिखना भूल गए” धन्नो की बात ग़लत तो नहीं थी, चुप चाप सुनना पड़ा. सुनने के लिए दो कान हैं, बस एक से सुनके दूसरे से बाहर निकाल दो. बोलने वाले का मन भी हलका हो जााता है, और सुनने वाला भी emotional नहीं होगा.

मैंने धन्नो से कहा “बात तो तू बिलकुल ठीक कह रही है धन्नो, क़लम भी थोड़ा बहक गई है, लेकिन फिर याद तो क़लम ने ही दिलाया की आज धन्नो की सीरीज़ लिखना है. पिछले एक सप्ताह में biking की कोई कहानी नहीं लिखा. चलो घर का बुद्धू घर को आये तो उसे भूला नहीं कहते. क़लम ने फिर से अपनी बाइकिंग सीरीज़ लिखने की रफ़्तार पकड़ ली है.”. मेरी बात सुनकर धन्नो पूरी convince हो गई फिर और तेज़ ट्रेल पे भागने लगी. बोली “तुम तर्क अच्छा देने लगे हो, सच बात को कैसे नकारूं”

साथी bikers ने colby lake पे बुलाया था जो हमारे नए घर से थोड़ी दूर है. बाइकिंग के लिए तैयार होते होते भी देर होगई. धन्नो ट्रेल पे भागी जा रही थी हमें लगा की हम नियमित समय पर नहीं पहुँच पाएंगे. “भाग धन्नो भाग” कहते हुए हम झील की ओर बढ़ रहे थे. हमें लगा की हमारे और धन्नो के बस का नहीं है आज देर हो ही जाएगी फिर हमने अपने साथियों को मैसेज किया की हम 10 मिनट देर से पहुंचेंगे सो वोह लेक के चक्कर लगाना शुरू करें हम join करलेंगे.

पिछली बार भी हम 3 मिनट देर से आए थे और लेक के पास हरी बेंच पे मिलना था लेकिन उस दिन हमारे साथी बाइकर थोड़ा देर होगये और मैं पहले आगया तो मुझे उतना बुरा नहीं लगा. धन्नो बोली ग़लती तो तुम्हारी है मैं तो तेज़ भाग सकती हूँ लेकिन हमारी एक सिमा है. आख़िर हम गंतव्य स्थान पर पहुँच ही गए ,पूरे 10 मिनट लेट. लोग वहां रुक कर हमारा इंतज़ार कर रहे थे. साथी बाइकर के दो बच्चे भी Biking को आए थे. उन्होंने अंग्रेजी में हमसे मुस्कुरा के कहा “uncle you are 10 minute late

बच्चों की मुस्कान में मासूमियत थी और एक भाव था. धन्नो बोली अब जो हुआ सो हुआ अगली बार कभी लेट न होना. बाइकिंग एक स्पोर्ट्स है और स्पोर्ट्स में discipline होना ही चाहिए तय समय की पाबंदी जरुरी है. तुम अपने देसी पार्टियों में टाइम से नहीं पहुँचते हो शायद वोह आपसी understanding है. लेकिन अपनी आदत न बिगाड़ो. अपने लोकल मित्रों से सीखो, अगर उनको घर आने का निमंत्रण 7:00 बजे का है तो 6:50 को  पहुँच कर अपनी कार में 7:00 बजने का इंतज़ार करते हैं और 7:00 बजे घर की घंटी बजाते हैं, की वोह आ गए.

धन्नो तू तर्क अच्छा देती है, अच्छी बातें तो अपनानी ही चाहिये हम भी कोशिश करेंगे, बचपन से तूने कितना कुछ सिखाया है धन्नो, अब भी तू बच्चों जैसा ख़्याल रखती है मेरा. अगली बार से लेट होने की शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगा.

वादा रहा. चलते चलते बॉलीवुड का यह गाना याद आ गया

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