
ट्रेन के डिब्बे से दूर गिरी लाश ने पूछा-
“भाई, इतना हंगामा क्यों है?
मौत तो एक आम सी घटना है”
पास पड़ी दूसरी लाश बोली
“भाई, घटना नहीं दुर्घटना है;
अकस्मात ही हम लाश बन गए
यमराज ओवरटाइम कर गए।
शायद, उन्हें अवकाश पर जाना था;
अपना काम पहले निपटाना था।”
“वो तो ठीक है, लेकिन
यहाँ, नेता जमा हैं!”
“बुद्धू, वो ख़बर सुनकर आये हैं;
पता करने कि ओवरटाइम की
इजाज़त कैसे मिली!
कहाँ चूक हुई?
जाँच कमिटी का गठन होगा;
मृतकों के परिवार को सांत्वना देंगे
सहायता राशि मिलेगी;
राहत का काम ज़ोरो से चलेगा;
रेल मंत्री का बयान छपेगा।”
“इसमें नया क्या है!
मरने के बाद अब बचा क्या है!”
“अच्छा है खामोश हो जा,
लाशें बोलती नहीं।
सहायताकर्मी ने सुन लिया तो
अनुदान राशि मरणोपरांत से बदलकर
घायलों वाली कर दी जाएगी
अभी जनता थोड़े दिनों में सब भूल जाएगी”
लाश बुदबुदाई
ज़िंदा रहकर नहीं बोले तो
अब लाश बने रहना, आसान है
लाश मौन हो गई 😔
ख़लीक़

