धन्नो आज थोड़ी भावुक सी थी मेरे लिए नहीं मेरी परछाई के लिए.. बोल पड़ी “एक फोटो खींच दो जिसमें मैं और बस तुम्हारी परछाई हों “. कई दिनों बाद तेज़ धुप निकली और धन्नो परछाही को देख कर एकदम खुश थी. मैंने भी झट फ़ोन से फोटो खिंच ली..धन्नो बोली देखो क़द में, हम दोनों, बराबर हैं.
धन्नो मुझ से अच्छी तरह वाक़िफ़ है.. हो भी क्यों न बचपन से साथ है जब पाँव भी ज़मीन को न आते थे. अचानक बोल पड़ी, “आज मेरा ध्यान परछहाई पे ज़यादा है. आज तो तुम बोर से होगये. भाभी जी को भी साथ ले आते, अब तो पीछे कैरियर भी है ना”. मैं भी कहाँ चुंकता, बोल पड़ा “धन्नो, कोई बॉलीवुड की पुरानी फ़िल्म की शूटिंग वाला सीन थोड़े ही करना है“, फिर हम दोनों हंस पड़े.
धन्नो बोली “फिर चलो अब घर चलते हैं भाभी जी तुम्हारी राह देख रही होंगी”. मैं भी अपनी चाल में धीरे धीरे चल रहा था.. धन्नो बोली “कहाँ ग़ुम हो.. भाभी जी का इतना ध्यान.. ऐसे संभल के चल रहे हो जैसे सच मुच भाभी जी कैरियर पे बैठी हों”. मैंने कहा धन्नो “सोंच और सपनों का अपना ही आनंद है“
देखते देखते घर आ गया और 10 मील का लक्ष कैसे पूरा हो गया पता ही नहीं चला

