(Conversation with a Tree)
आज मौसम हो गया, cozy
Outdoor biking, का मज़ा, लेलो, जी
अचानक पेड़, नज़र आया
मैं तो पहचान, भी न पाया
आ मेरे पास, आ
मुझ से गले लग, जा
तेरा इंतज़ार था, जैसे
Back home में, तेरी माँ को, है, जैसे
मेरी टहनियां, सूखी हैं
पत्ते भी, गायब हैं
Fall में रंगीन फोटो, खिचाया था
मां की गोद में भी, खेला था
माँ भी कमज़ोर, हो गई है
बुढ़ापे का ज़ोर, हो गया है
माँ तेरी बाट, जोहती है
तेरी किलकारियां, याद करती है
तेरी आवाज़ अब भी, गूंजती है
आँगन में, खेलता था
कितना सुनसान, हो गया है
कितना वीरान, हो गया है
पेड़ तू सच, बोलता है
तू “तेरा सच”, बोलता है
Back-home था, वोह मेरा
Back-home हो गया, अधूरा
पेड़ तेरे पास मैं फिर, आऊंगा
Back-home भी, जाऊंगा
लेकिन वहां अब वोह ख़ुशी, नहीं है
क्योंकि मेरी माँ, अब वहां नहीं है

