कल का दिन थोड़ा नोक झोक में गुज़रा, लेकिन शाम होते होते खुशियां एक जुट होकर झोली में समा गयीं. भाग्यवान होने का अहसास, अद्भुत है. पत्नी के साथ घर के पास वाली ट्रेल पे walk, फिर उसके बाद धन्नो के साथ शहर की सैर, मानो धन्नो ने भी मुझे खुश करने का बेड़ा उठाया हो “Colby lake” के पास कब ले आई पता ही नहीं चला. Thousands lake में सर्वोपरि मेरा पहला प्यार, बस मैं झील को निहारता ही रहा.एक राहगीर ने पूछा “you seem to be lost”. मैंने भी दो टूक जवाब दिया “feeling blessed to find, my lost love”




थोड़ी देर में धन्नो के दो और दोस्त आ गए. धन्नो पिछले साल इनसे मिली थी, लेकिन ये कभी कभार ही आते हैं. धन्नो को कोई साथी मिल गया और क्या चाहिए. हम झील की trail का चक्कर लगाने लगे, पूरे 2 मील का एक फेरा है. अचानक धन्नो बोली “देखो वोह कितना तेज़ भाग रहे हैं, और उनकी पैडल भी हमसे धीमी है”. धन्नो समझ गईं ये इलेक्ट्रिक बाइक है. “बदलाव अच्छा होता है धन्नो” मैंने बोला. धन्नो ने कुछ जवाब नहीं दिया. माहौल शांत था, और हम ट्रेल पे भागे जा रहे थे, इतने में कायें कायें की आवाज़ सुनाई दी, देखा तो पंछियों का झुण्ड ऊपर था. लगा Colby lake के खुशियों के दिन वापस आए और अब पंछी भी लौट आए.
धन्नो बड़ बड़ करती है, बेवजह टून टून घंटी बजाती है. लेकिन आज, अचानक इतनी ख़ामोशी अछि नहीं लगी, मैंने पूछ ही लिया. “धन्नो, इतनी शांती अच्छी नहीं है, सब ठीक तो है”. धन्नो बोली तुम्हारे साथ फिर से जीवन में TREK BIKE बनके आई. बचपन में Atlas का रूप था मेरा. पिछले 5 साल से TREK बने रहने में कुछ excitement नहीं दिखता. मुझे भी निखरना है, देखो हमारी दोस्तों को इलेक्ट्रिक बाइक बनकर लगा मुझे चिढ़ा रही होँ. मानो कह रही हैं धन्नो अपने नाम की तरह तू कितनी backward है.
अमेरिका में immigrants का नाम बदलने का चलन है. शौक़ कहूं या मजबूरी, judgmental होना अच्छा नहीं है. धन्नो का नाम धन्नो ही है. बचपन के Atlas से trek के सफ़र तक. मैंने, धन्नो से कहा “अपनी पहचान और अपनी संस्कृति पर गर्व है हमें” . America की धरती पे इस बात को प्रोत्साहन भी मिलता है, रंग बिरंगी संस्कृति को सजो कर, आगे बढ़ना आसान होता है.
जीवन के इस पड़ाव पे धन्नो, तू वापिस आई, बचपन में टूशन, और स्कूल ले जाती थी. आज मेरे साथ बस सैर सपाटे, मकसद भी कितना बदल गया धन्नो, “मुझे बिल्कुल चुस्त दुरुस्त रखना है. Fitness age सदा 25 साल बनी रहे”. हमें तो बस धन्नो इसी रूप में चाहिए. “मैं, तू, और परछाई, मिलकर हम पूरे’ होते हैं”. धन्नो बस तेरा कथन तुझे याद दिला रहा हूँ. तभी मुझे एक वृद्ध दम्पति की याद आई जो इलेक्ट्रिक बाइक चला रहे थे, सेवानिवृत्त थे. पिछले साल उन से मिसिसिपी नदी के पास ट्रेल पर मिला था.अपनी बाइक हमें भी trial ride को दे रहे थे.
मैंने कहा “धन्नो मुझे fit रहना है, 25 साल वाला fitness age का लक्ष्य बस तेरे regular बाइक बने रहने में ही है. यानी तू धन्नो, बनी रह. रफ़्तार में भागने का नाम ही ज़िन्दगी है, लेकिन अपने दम पर.जीवन का क्या पता, जब हम भी भाग न पाएंगे,अपने बुते, तू इलेक्ट्रिक बाइक का रूप ले लेना धन्नो, फिर तुम्हारा नाम क्या रखेंगे.
धन्नो चुप चाप सुनती रही अंत में भावुक होगई फिर बोली, मुझे किसी की कोई परवाह नहीं, तुम fitness बरक़रार रखो और मैं “धन्नो” बनी रहूं”.. हम दोनो वापिस रफ़्तार से ट्रेल पे भागने लगे.
चले चलते यह गाना याद आगया , तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूं मज़ा जीने का और भी आता है
Note : This written on Mar-11-2020

