धन्नो (Bike series 3)

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धन्नो के लिए येह साल बड़ा ही खुशियों भरा है. वह अकेली नहीं, अब अपने रंग बिरंगे साथियों के साथ ट्रेल पे रफ़्तार से दौड़ती है.यूँ तोकोरोना का रोना थमने का नाम नहीं ले रहा, लेकिन धन्नो को इसका फ़ायदा…

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मेरी साइकल

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तस्वीर का सहारा लेना मेरी आदत बनती जा रही है, बात जो कहनी है उसे कहना इतना मुश्किल होता है क्या. मेरे जैसे लेखक के लिए यह उत्तर के लिए "हाँ" बोलना ही होगा. शायद यही "सही जवाब" होगा. सही…

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सुबह

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सुबहसवेरा होगया हाँ काली रात के बाद की सुबह अंधकार को मिटाती हुई, नई आशा और उम्मीदों के साथ. रविश कुमार जैसी तस्वीर शब्दों में बयां करना अलौकिक है, मुझे तो तस्वीर का सहारा चाहिए. टहलने के लिए निकला था…

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