गांव मैं वापिस आऊंगा

गांव मैं फिर आऊंगा.
एक बोझ है मुझ पर.
तेरे प्यार का.
उस मिटटी का.

एक क़र्ज़ है जैसे.
मेरा फ़र्ज़ है जैसे.
ज़िन्दगी तो मुख़्तसर सी है
क्या पता कब शाम हो जाये

चला तो था उसी गांव से.
बेहतर ज़िन्दगी की, आस लिए.
रास्ते से, भटक गया शायद.
बड़ी देर, होगई शायद.

गली में क्रिकेट, खेल रहा था.
मैं अजनबी, बन गया था
मुझे बोलिंग के लिए बुलाया
नाम पूछ के बुलाया.

घबरा के उठ गया मैं
गहरी नींद में, डर गया मैं.
नाम अपना बताया.
अपना परिचय कराया

मिट्टी तो पहचानती है.
अपनों को जानती है.
अपने सब हैं, यहीं लेटे.
मिट्टी येह, रिश्ता कैसे छूटे.

गांव मैं फिर वापिस आऊंगा.
कब्रिस्तान भी जायूँगा.
एक ढेला मिटटी, उधार लाऊंगा.
गांव मैं वापिस, आऊंगा.

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