जीवन में भी कितने आयाम हैं. हर आयाम की अपनी ज़रूरतें हैं उमंगें हैं और ज़िम्मेदारियाँ हैं. हर आयाम को जीतते रहने की भरसक कोशिश को ही जीना कहते हैं. गब्बर का डायलॉग याद आगया “जो डर गया वोह मर गया” किसको पता था positive होने का भी डर हो जायेगा, लेकिन positive के डर पे भी काबू निडर होकर ही पाया जा सकता है. Pandemic के भी अब गिनती के दिन रह गए हैं. इन्सान की इच्छा शक्ति और ईमानदार प्रयास ऊपर वाले को भी मजबूर कर देता है. यमराज भी खुश होंगे ओवरटाइम ख़तम हुआ अब work life balance का मज़ा वो भी ले जल्द सकते हैं.



धन्नो भागते हुए रुक गई आज एक नई बेंच नज़र आई, सिल्वर रंग की सामने खूबसूरत फूल, parking lot में महंगी कारें, साथ में झूमते पेड़ और ठंडी हवा. हम अक्सर इधर बाइकिंग को आ जाते हैं. बेटे को कराटे क्लास में छोड़, फिर थोड़ा धन्नो के साथ सैर. यहाँ से क्रॉस करते हुए बड़ा अमेरिकन फ्लैग दिखा धन्नो बोली रुक जायो फोटो खींचते हैं. फ्लैग के नीचे बोर्ड था वहां अंग्रेजी में कुछ लिखा था. “COOPERATIVE COMMUNITY FOR ACTIVE ADULTS 55 & OLDER”.
धन्नो अंग्रेजी समझ न पाई मैंने बोला वही वृद्धा आश्रम, बस यहाँ नर्स और डॉक्टर की भी स्विधा होती है और हॉस्पिटल भी क़रीब होता है. धन्नो थोड़ा सोंचने लगी फिर बोली तुम आज में जियो. भाभी जी के साथ मुस्कुराते रहो और मेरे साथ भागते रहो. Live for today in a daylight compartment.अंग्रज़ी सुनकर मैं हैरान रहगया,तूने अंग्रेजी कब सीख ली, धन्नो. “Trek bike हूँ कोई Atlas साइकल नहीं, समय के साथ चलना है तो सीखना पड़ता है, you get my point“.
मुझे पुरानी बॉलीवुड movie का सीन याद आगया जब हीरो नशे में होता है तो अंग्रेजी में डायलॉग बोलने लगता है धरम पाजी का वो मशहूर डायलॉग याद हैना “बुढ़िया going jail and चक्की पीसिंग and पीसिंग”. धन्नो से पहले अंग्रेजी कभी नहीं सुना इसलिए मैं अंदर से थोड़ा डर गया, सोंचा अब थोड़ा कम बात करूँ तो अच्छा है. वैसे चक्की पीसिंग जैसा कोई ख़तरा तो नहीं था.





आज हम फिर एक ट्रेल गुज़र रहे थे, ट्रेल के एक ओर मकान और दूसरी ओर रंग बिरंगे खूबसूरत फूल और पास में खूबसूरत झील. तभी मुझे एक वृद्ध महिला दिखाई दी जो अपने कुत्ते के साथ खेल रही थी. बार बार गेंद दूर फेकती और कुत्ता दौर कर उसे वापिस ले आता. दोनों खेल में मगन थे जैसे मैं अपनी धन्नो के साथ ट्रेल पे मगन रहता हूँ. थोड़ा और आगे गया तो मुझे एक महिला फूलों में पानी देते हुए नज़र आईं लगा की वोह फूलों की क्यारी की देख रेख करती हैं. मैं रुक कर बातें करने लगा वृद्ध महिला खुश होगई कोई तो बात करने वाला मिला. पूछने पर उसने बताया “yes we do this every year this is city’s land but it is a volunteer work. Many from this community work together to make this garden blooming, it keeps us busy and gives some happiness and smile”
जीवन में कई आयाम हैं और नियम के अनुसार रास्ता सभी का एक सा है बचपन जवानी और फिर बुढ़ापा. बिलकुल सड़क की ट्रेल की तरह की घर से निकल कर घर तक जाना है, तेज़ भागना है bike ride के मज़े लेना है. ईश्वर ने जनम दिया और फिर ईश्वर के पास लौट जाना. लेकिन फिर जीवन का मतलब क्या है bike ride जैसे मज़े करना. शायद हमें Trek bike ही याद रह गई Atlas cycle से स्कूल जाने का सफ़र भूल गए. मतलब सुख और दुःख दोनों के साथ अच्छी सोंच के साथ और परिश्रम करने का नाम ही जीवन है.
लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव यानी बुढ़ापा में ऐसा सन्नाटा देख दिल दुखी होगया. कुत्तों से खेलना और बाग़बानी करने से हमें कोई गुरेज़ नहीं, लेकिन भगवान से अच्छी उम्मीद रखनी चाहिए. धन्नो बोली आज तुम्हारी लाल T-Shirt अच्छी लग रही है, चलो अब घर चलें.
चलते चलते धरम पाजी का चक्की पीसिंग वाला पूरा डायलॉग भी सुन लें


Very nice story. Good message