(Bike series)
“कई दिनों बाद तुम्हें मेरा ध्यान आया. माना की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं, लेकिन तुम थोड़ा बदल भी गए हो. हमारे साथ सैर करने का टाइम भी पिछले एक सप्ताह से बस अब ‘आधा घंटा’ हो गया है. तुमको अब हमारी बातें लिखना भी पसंद नहीं है. तुम्हारा बहाना भी अच्छा है, पढ़ने वाले लोग बस धन्नो को ही पढ़ के बोर हो जायेंगे. अच्छा तर्क है लेकिन, अपनी क़लम पे भरोसा भी होना चाहिए.”




आज का दिन धन्नो का था. बस बोले जा रही थी, और मैं ख़ामोशी से सुनता जा रहा था. धन्नो इतनी शिकायती कभी नहीं थी. कोरोना काल में नकात्मक सोंच स्वाभाविक है, धन्नो को भी लगता है इसका असर आ गया. परिवार में सबका हक़ है, गिला शिकवा करना कोई ग़लत तो नहीं, अंत में इस से प्यार बढ़ता है. बस एक दूसरे को सुनने की समझने की और सामंजस्य बनाने की ज़रूरत होती है.
“शोले की धन्नो एक घोड़ी थी, और मैं तुम्हारी साइकल. लेकिन तुम मुझे अब तक अलग पहचान नहीं दिला पाए. बचपन में शोले फ़िल्म देखी उसी सप्ताह पिताजी साइकल लाये और मेरा नाम धन्नो चुना गया. बरसों बीत गए हमारा तुम्हारा साथ नहीं छूटा, और अब मैं फिर से तुम्हारे जीवन में लौटी . तुम्हारा ख़्याल रखने के लिए. तुम्हें चुस्त दुरुस्त रखने के लिए. अमेरिका में नाम बदलने का चलन आम है, लेकिन मुझे बचपन की यादों में जीना है, ‘धन्नो’ वाली पहचान नहीं खोना है”
“यहाँ नाम कितना कॉमन होता है. एक नाम के कितने स्टीव मिल जायेंगे. शहर का नाम ढूंढो तो अपने शहर Woodbury भी कई मिलेंगे. लेकिन सभों की अपनी पहचान है. तुम बरसों बाद भी हमें अलग पहचान न दिला पाए. अभी भी लोग शोले वाली धन्नो का नाम लेकर मुझे जोड़ते हैं, तो मुझे अच्छा नहीं लगता”. धन्नो, पता नहीं क्यों चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी. मैं भी चुप चाप सुन रहा था, आप भी सुन ही रहे होंगे. क्या करूँ मेरी तो मजबूरी है, लेकिन आपका प्यार है जो अबतक धन्नो को सुन रहे हैं.
धन्नो का शिकायती अंदाज़ जारी था और हम ट्रेल पे भागे जा रहे थे. थोड़ी दूर निकल आये. एकाएक धन्नो बोली “अब आगे मत बढ़ना, मैं तुम्हारी साइकल हूँ, नाव नहीं जो तुम्हें झील की भी सैर करा दूँ” ट्रेल के अंतिम छोड़ पे हम खड़े थे.
मैंने कहाँ “धन्नो मुझे बाइकिंग बहुत पसंद है, अब इस उम्र में बोटिंग का शौक़ नहीं पालना”.आज तुम्हारी ही बातें सुनते हुए हम 15 मील भाग लिए, बस तुम्हारा साथ बना रहे हम युहीं भागते रहें. मैं तुम्हारी कहानी लिखता रहूं, क़लम का साथ रहा तो तुम्हारी पहचान बनते बनते बन जाएगी. हाँ हमारे जीवन काल में ऐसा होगा” यह सुनकर धन्नो थोड़ी भावुक हो गई “ऊपर वाला तुम्हें लम्बी उम्र दे, मेरी बातों का बुरा नहीं मानना, चलो अब बहुत देर होगई घर चलें भाभी जी इंतज़ार कर रहीं होंगी”
चलते चलते एक गाना याद आ गया “तेरा साथ है कितना प्यारा.… “


Excellent story …. Really loved the line … alag pahchan Nahin Bana paye ….