इश्क़
हमारी नज़रों का क़ुसूर तो नहीं, पूरे होशो-हवास में हमने देखा। जब जमुना किनारे धन्नो के साथ सैर कर लौट रहा था, तो हमारी ऑंखें टिकी की टिकी रह गईं. जहां जमुना किनारे धन्नो खुश होकर, गंगा-जमुना और अपने मिलन के गीत गा रही थी "तू गंगा की मौज मैं जमुना की धारा, हो रहेगा मिलन.. हमारा तुम्हारा" धन्नो हमारे लिए ऊपर वाले का वरदान है। एक रूह, जो अप्सरा बनकर, कहीं भी साइकल में समा जाती है। ये सब सोच ही रहा था कि हमारी अटकी हुई नज़रें, जैसे कह रही हों "हमारे प्यार को किसकी नज़र लग गई"।

