इश्क़

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हमारी नज़रों का क़ुसूर तो नहीं, पूरे होशो-हवास में हमने देखा। जब जमुना किनारे धन्नो के साथ सैर कर लौट रहा था, तो हमारी ऑंखें टिकी की टिकी रह गईं. जहां जमुना किनारे धन्नो खुश होकर, गंगा-जमुना और अपने मिलन के गीत गा रही थी "तू गंगा की मौज मैं जमुना की धारा, हो रहेगा मिलन.. हमारा तुम्हारा" धन्नो हमारे लिए ऊपर वाले का वरदान है। एक रूह, जो अप्सरा बनकर, कहीं भी साइकल में समा जाती है। ये सब सोच ही रहा था कि हमारी अटकी हुई नज़रें, जैसे कह रही हों "हमारे प्यार को किसकी नज़र लग गई"।

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पुल

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पुल अपना नया रूप लेकर फिर खड़ा हो गया। दो किनारों को जोड़ने की सेवा में लगा है। लेकिन भागती हुई गाड़ियों को क्या पता, उन्हें तो बस अपनी रफ़्तार से मुहब्बत है! रफ़्तार में गिरफ़्तार होकर पुल को ही झकझोर देती हैं।

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आग

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गुब्बारे की उड़ान देख धन्नो का ध्यान अटक गया. रंगबिरंगा गोला, कुछ आवाज़ें, और हवा से कर रहा था बातें. उसी दिशा में हम भी भागने लगे, जिधर गुब्बारा जा रहा था. उड़ने के लिए ऊर्जा चाहिए, गुब्बारे में आग जल रही थी. सवार लोग उत्साहित होकर तरह तरह की आवाज़ें निकाल रहे थे. जैसे धन्नो को सब कुछ पता हो, गुब्बारा नीचे उतरने वाला था, और हम भी वहां पहुंचने के लिए रास्ता ढूंढने लगे. सड़क के बीचो बीच गुब्बारा उतरने लगा, दोनों ओर से गाड़ियां रुक गयीं. धीरे धीरे गुब्बारा सिकुड़ने लगा, फिर धराशाई होगया. पूरा क्रू उसे समेटने में लगा था, लोग खड़े होकर नज़ारा देख रहे थे. काफ़ी ख़ुशी का माहौल था, बच्चे तालियां बजा रहे थे, मानो उनकी ईद होगई.

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