कौन कहता है सिर्फ सजने संवरने का शौक़ औरतों को ही होता है. अगर आपको यूँ कहूं की हमारी धन्नो भी बहुत शौक़ीन है तो आप यक़ीन करेंगे. लेकिन यह सच है. धन्नो अपने जीवन काल में पुरानी साइकल को छोड़ नई साइकल में समा सकती है, मतलब अपने जीवन काल में नया शरीर.यह अनोखा वरदान उसे ईश्वर ने दिया है. अभी कुछ महीने पहले ही Trek FX2 से Trek verv 3 का रूप लिया है. मैंने भी दिल खोल खर्च किया सोंचा कहीं धन्नो का दिल छोटा न होजाय.




नई बिलकुल ब्लू ब्लू धन्नो मेरे ब्लू जैकेट के साथ मैच कर गई. मैंने वाटर बोतल केज लाल रंग का लगा दिया था. धन्नो से कहा यह लाल बिंदी लगा ले, धन्नो हंस पड़ी.साथ में आगे सफ़ेद ब्लाइट और पीछे लाल लाइट जो chargeable है और blinking भी.
कल शॉप गया तो नज़र ज्वेल्लेरी पर टिक गई सोंचा कुछ ख़रीद लूँ. कई खूबसूरत आभूषण ग्लास से झांक रहे थे. मिलियन डॉलर वाले कुर्सी की डींग हांकने की बात याद आ गई. गिफ्ट का वादा किया तो निभाना पड़ेगा, लेकिन हमारी नज़रों की पसंद पे हमें ख़ुद भरोसा न हुआ. अब आभूषण खरीदना सब्ज़ी खरीदने जैसा तो है नहीं, अपनी ही नज़रों पे ना भरोसा करने वाली बात कह कर दिल को समझाना पड़ा. उन्हें साथ लेके आयूंगा, फिर वोह ख़ुद चुनके कहेंगी “देखो येह वाला कैसा रहेगा, फिर बोलेंगी येह वाला अच्छा था या वोह वाला. तभी थोड़ी देर के लिए अगर फ़ोन के स्क्रीन पे मेरी नज़रे चली जाए, फिर आगे की बात ना लिखूं तो अच्छा है”. वैसे मैं खुद को याद दिलाने के लिए लिख रहा हूँ, पूरे धयान से हर ज्वेल्लेरी को देखूंगा और कहूंगा पहले वाला ज़्यादा सूट कर रहा था. ध्यान बिलकुल वैसा ही जैसा धन्नो के साथ ध्यान ट्रेल पे रहता है.



बात तो धन्नो की कर रहा था लेकिन थोड़ा भटक गया, निजी बातें सुनकर आप भी बोर हो जाते होगे. धन्नो के ही क़सीदे लिखना थोड़ा एकभग्गू सा लगता है, कहानी में थोड़ा रोमांस होना भी ज़रूरी है. Trek Verv 3 होकर धन्नो का थोड़ा मॉडर्न लुक अच्छा लगता है. कल अचानक धन्नो की एक फुटेज 10 सेकंड की TV पे नज़र आई. धन्नो के ख़ुशी का ठिकाना न रहा. बोली TV पे एक झलक ही सही आधा दिख जाना भी बड़ी बात है, लगता है तुम धन्नो की अलग पहचान, अपने जीते जी ज़रूर दिला पाओगे. शोले वाली धन्नो को लोग भूलने लगेंगे.





हमारा बैकयार्ड भी नज़र आया, जहाँ तुम अक्सर बैठ के सुबह की चाय पीते हो. चाय झील और चिरयों की आवाज़ में शायद कोई रिश्ता सा बनता जा रहा है. तुम्हारे शहर Woodbury की पानी की टंकी भी नज़र आई. अब शहर ने 17 सालों में इतना प्यार दिया तो इसे पराया कहना ठीक नहीं होगा.
वैसे TV पे शो का सन्दर्भ कुछ और था एंकर बार बार भारत और अमेरिका को compare कर रहे थे. भारत की अपनी परिस्तिथियाँ हैं और अमेरिका की अपनी फिर इस तरह उदाहरण देना कहाँ तक उचित है. फिर याद आया पिताजी भी स्कूल के दिनों में कक्छा में first आने वाले शर्मा जी के लड़के का मिसाल अक्सर दिया करते थे. अगर पिताजी ना बोलते तो हम कैसे प्रोत्साहित होते और जीवन में जो भी हासिल किया उसी प्रोत्साहन का नतीजा है.
धन्नो भी अक्सर अपने भाभीजी की बात याद दिला कर कुछ न कुछ compare करती रहती है यूँ कहूं तो डराती भी रहती है. डरना भी चाहिए. आप भी सोंच रहेंगे कैसा प्रकरण है ये बाइकिंग का कोई ज़िकर ही नहीं था.. थोड़ा कुछ अलग था उम्मीद है अच्छा लगा होगा
जाते जाते एक गाना याद आगया जो वादा किया वोह निभाना पड़ेगा..

