शाम को ज़रा देर से निकला कोशिश करता हूँ की सबको समय दे पाऊँ, जब मैं वापिस गेराज में आया तो लगा धन्नो मेरी तरफ देख रही हो. उसकी खामोश अदा को मैं नहीं तो कौन समझेगा. मैं ने कहा की रुक, मैं अभी आया. जरा अपनी बाइकिंग वाली dress और jacket पहन लूँ. धन्नो को और क्या चाहिए, सैर. दिन भर गेराज में बंद होकर बोर हो जाती है. मैंने कहा धन्नो तू बहुत ख़ुशक़िस्मत है जो मैं तुझे मिला. रोज़ सैर कराता हूँ. पता है हमारे कुछ मित्र हैं जो पांच पांच साल तक बाइक को गेराज में टांग के रखते हैं. अब तू अपनी सहेली सैली को ही ले ले 10 साल टंगी रही थी वोह.




धन्नो को लगा की मैं एहसान जता रहा हूँ जैसे, गुस्सा होगई. धन्नो बोली हमारी भाभी जी भी यही बात तुम से कहती हैं, की आप कितने ख़ुशक़िस्मत हैं जो मैं आपको मिली. और फिर तुम क्या कहते हो, बोलूं. छोड़ो येह तुम्हारा आपस का मामला है, मैं आगे नहीं बोलूंगी. फिर तुम बिला वजह ही भाभी जी को कुछ कह दोगे. धन्नो अब गुस्सा ज़्यादा करने लगी है, उम्र का उसे भी असर हो गया या तो कोरोना का नकारात्मक भाव हावी होगया. आप भी धन्नो को शायद जान गए होंगे, ज़रूर बताईगा.
मैं चुप चाप ही धन्नो के साथ ट्रेल पे भागा जा रहा था. सोंचा उलझने से कुछ हासिल नहीं है, धन्नो ख़ुद थोड़ी देर में नार्मल हो जाएगी. थोड़ी दूर भागने के बाद एक अनोखा पेड़ नज़र आया. सड़क के किनारे और ट्रेल के बग़ल में लाइन से पेड़ लगे थे. लेकिन एक पेड़ काफ़ी सजा धजा था. चारों ओर फुल, एक अमेरिकन झंडा और साथ में एक जरसी भी टंगी थी. लगा किसी खिलाड़ी की जरसी है. पास में हरी बेंच रखी थी.
धन्नो बोली थोड़ा रुक जाते हैं. तुम इस बेंच पे बैठ कर थोड़ा सुस्ता लो. मैं धन्नो को बगल में खड़ा कर बैठ गया. धन्नो बोली रफ़्तार का नाम ज़िन्दगी है लेकिन रफ़्तार अपनी हद में हो तो अच्छा है. मैंने बोला रफ़्तार किसे नहीं पसंद है धन्नो हम दोनों. भी तो तेज़ भागते हैं. धन्नो बोली भागना अच्छा है लेकिन भागते हुए आपा खोना अच्छा नहीं है. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. धन्नो ने फिर कहना शुरू किया.
बेंच पे बैठ के 2 मिनट मौन कर ऊपर वाले से प्रार्थना करो. कुछ सप्ताह पहले इसी पेड़ से टकड़ा कर तेज़ कार चला रहे एक नवयुवक को अपनी जान गंवानी पड़ी. रफ़्तार में आपा खो बैठा, पेड़ को भी नुकसान पहुंचा लेकिन थोड़े दिनों में पेड़ फिर से हरा भरा हो गया. युवा हाई स्कूल का छात्र था और एक अच्छा हॉकी प्लेयर था. इसलिए पेड़ से एक खिलाड़ी की जरसी लटक रही है. युवा अपने खेल की प्रतिभा के लिए स्कूल में जाना जाता था. कहते हैं शहर में अंतिम संस्कार वाले दिन उसके सम्मान में लोगों ने हॉकी स्टिक ख़रीद कर अपने दरवाज़े के बाहर लगाई थी. ऊपर वाला युवा के आत्मा को शांति दे.
पेड़ से लगा अमेरिकन फ्लैग लहरा रहा था, पेड़ की बेगुनाही को बयाँ कर रहा था. जीवन अनमोल है, माँ बाप पे क्या बीती होगी जवान बेटे के अर्थी का ग़म, जीते जी मरने जैसा है. माँ बाप रोज़ यहाँ आते हैं. पेड़ पे नए फूल डालते हैं . पानी देते हैं, और पेड़ को झूमते हुए देख कर थोड़ा इत्मीनान महसूस करते हैं. लटकी हुई जर्सी देख उनकी ऑंखें भर आती हैं.. लेकिन जर्सी पहनने वाला अब लौट के नहीं आएगा.. रफ़्तार ने उसके ज़िन्दगी की रफ़्तार रोक दी…
यह सब लिख कर मेरी भी ऑंखें भर आईं, शाम होगई सूरज पूरा डूब चूका था धन्नो बोली चलो अब घर चलें.. बस अपनी रफ़्तार में रहना..
चलते चलते Bollywood का मशहूर गाना याद आगया, दुनया से जाने वाले जाने चले जाते है कहाँ


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आंखों को भरा भी
सोचकर दिल उदास मेरा
आपकी गहरी सोच का शुक्रिया।
रफ़्तार पकड़ने की अपनी हद ही तो हम नहीं जान पाए,
कभी बहुत धीरे हो कर वक्त के पीछे हो गए
और कभी बहुत तेज हुए तो बहुत कुछ खो दिया